रविवार, अक्तूबर 16, 2011

जस्सी दी ग्रेट 12



गगन और जस्सी उससे दूर खङी थी, और शायद आपस में उसी के बारे में बातें कर रही थी । पर उसका पूरा ध्यान जस्सी और उसकी अदभुत समस्या पर ही केन्द्रित था, और अभी तक उसने सिर्फ़ इतना ही महसूस किया था कि उनकी कोठी पर किसी प्रकार की प्रेतछाया नहीं थी, जैसा कि राजवीर और करमकौर का ख्याल था, और जैसा कि अब इस दुनियाँ को रहस्यमय तरीके से अलविदा कह चुके ढोंगी बाबा परमीत सिंह ने उन्हें जिन्नबाधा बताया था ।
जस्सी के कमरे में, या उसकी खिङकी के पार भी, कहीं कुछ नहीं था, जैसा कि उसे विवरण में बताया गया था । सबसे बङी बात जस्सी के दिमाग में कुछ नहीं था, जो कि उसने खुद देखा था ।
मगर उन वीडियो क्लिप में बहुत कुछ था । जो एन बाधा के वक्त किसी अज्ञात प्रेरणा से शूट हो गये थे, और प्रसून को एक नये खेल की चुनौती सी दे रहे थे ।
वह बखूबी जानता था कि यदि इन क्लिप को किसी ऊँचे डाक्टर को दिखाया जाता, तो वो बिना किसी चेकअप के तुरन्त एक बीमारी की घोषणा कर देता..नींद में चलना । खुद उसका भी ख्याल कुछ कुछ ऐसा बनते बनते रह जाता था । पर उन क्लिप में जो वह देख रहा था, वो कोई डाक्टर शायद कभी न देख पाता, और वही तो अदभुत था, बेहद अदभुत ।
उसने आधी हो चुकी सिगरेट का अंतिम कश लिया, और सिगरेट को दूर उछाल दिया । फ़िर जब उसे कोई बात समझ में नहीं आयी तो वह जवान लङकियों की दिलचस्प बातों में शामिल होने की जिज्ञासा लिये उनके पास आ गया । ये शायद पंजाब की फ़िजा का रोमांटिक प्रभाव था ।
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प्रसून जी ! जस्सी उसकी तरफ़ आकर्षित होकर मधुर स्वर में बोली - वैसे तो आप इंटरनेशनल पर्सन हो । पर पंजाब में, खास हमारे घर में, और हमारे ही सामने आपको मौजूद देखकर हम कितना ग्रेट फ़ील कर रहे हैं, शायद आप सोच भी नहीं सकते । ये चिकनवाली बोल रही थी कि प्लीज प्रसून जी से राजीव जी के बारे में कुछ पूछ ।
प्रसून यहाँ आने से कुछ ही पहले विदेश से लौटा था । उसके बाल कन्धों तक बङे हुये थे और किसी बर्फ़ीले स्थान में रहने के बाद उसकी गोरी रंगत किसी अंग्रेज के समान ही नजर आने लगी थी तथा उसका लुक एकदम माइकल जेक्सन जैसा लग रहा था । जो लगभग उसी जैसे लुक वाली जस्सी को खासा आकर्षित कर रहा था, और चिकनवाली को सेक्सुअली एक्साइटिड कर रहा था ।
दोनों लङकियों ने उसे इम्प्रेस करने के लिये खासा सेक्सी परिधान पहना था । वे एक लूजर के साथ जींस पहने थी । जिससे उनके शर्ट से झलकते अधखुले उरोज मानों छलछलाकर बाहर निकलना चाहते थे ।
पर जब प्रसून ने इसका कोई नोटिस ही नहीं लिया तो चिकनवाली खासतौर पर झुँझला गयी, और आदतानुसार चिढ़कर जस्सी से बोली - देख जस्सी, ये सालिआ मेरी बहुत इनसल्ट कर रहा है, ऐसा न हो कि ये कुछ और बात कर दे । नहीं तो मैं नाराज हो जाऊँगी, उदास हो जाऊँगी, निराश हो जाऊँगी, और रो पङूँगी । 

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बहुचर्चित एवं अति लोकप्रिय लेखक राजीव श्रेष्ठ यौगिक साधनाओं में वर्षों से एक जाना पहचाना नाम है। उनके सभी कथानक कल्पना के बजाय यथार्थ और अनुभव के धरातल पर रचे गये हैं। राजीव श्रेष्ठ पिछले पच्चीस वर्षों में योग, साधना और तन्त्र मन्त्र आदि से सम्बन्धित समस्याओं में हजारों लोगों का मार्गदर्शन कर चुके हैं।