रविवार, अक्तूबर 16, 2011

जस्सी दी ग्रेट 2



- मुझे बङी फ़िक्र हो रही है । अंततः फ़िर वह गौर से मनदीप के चेहरे को देखते हुये बोली - पहले तो ऐसा कभी नहीं हुआ..लङकी जवान है ।
उसकी तरफ़ देखते हुये मनदीप को तुरन्त कोई बात न सूझी । जस्सी यकायक बाजार में चक्कर खाकर गिर गयी थी, और जैसे तैसे लोगों ने उसे घर तक पहुँचाया था । घर तक आते आते उसकी हालत में थोङा सुधार सा नजर आने लगा था । पर वह इससे ज्यादा कुछ न बता सकी कि अचानक ही उसे चक्कर सा आ गया था, और वह गिर गयी ।
डाक्टर ने उसका चेकअप किया, और फ़ौरी तौर पर किसी गम्भीर परेशानी से इंकार किया । उसके कुछ मेडिकल टेस्ट भी कराये गये, जिनकी रिपोर्ट अभी मिलनी थी । करीब शाम होते होते जस्सी की हालत काफ़ी सुधर गयी पर वह कमजोरी सी महसूस कर रही थी । जैसे उसके शरीर का रस सा निचोङ लिया गया हो ।
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पर मुझे तो । मनदीप बोला - फ़िक्र जैसी कोई बात नहीं लगती । शरीर है, इसमें कभी कभी ऐसी परेशानियाँ हो जाना आम बात है ।
दरअसल राजवीर जो कहना चाहती थी, वो कह नहीं पा रही थी । उसे लग रहा था, मनदीप पता नहीं क्या सोचने लगे ।
मनदीप सिंह जस्सी का बाप था, सभी उसे बराङ साहब कहकर पुकारते थे । उसकी उमर पैंतालीस साल थी । पाँच फ़ुट ग्यारह इंच लम्बा बराङ एक मजबूत कदकाठी वाला इंसान था और हमेशा कुर्ता पजामा पहनता था ।
वह स्वभाव से बेहद अहंकारी आदमी था और उसे अपने अमीर होने का बहुत अहम था । जिसके चलते वो हमेशा दूसरों को नीचा ही समझता था । वह पगङी बाँधता था और उसके चेहरे पर बङी बङी दाढ़ी मूँछें थी । वह रोज ही शराब पीता था, और चिकन खाने का बहुत शौकीन था ।
वैसे जस्सी और उसके माँ बाप कभी कभी गुरुद्वारा जाते थे लेकिन फ़िर भी मनदीप नास्तिक ही था । इसके विपरीत राजवीर कामचलाऊ धार्मिक थी । जस्सी न आस्तिक थी, और न ही नास्तिक । वो बस अपनी मदमस्त जवानी में मस्त थी ।
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सुनो जी । अचानक राजवीर अजीब से स्वर में बोली - कहीं ऐसा तो नहीं कि ये भूत प्रेत का चक्कर हो?
मनदीप ने उसकी तरफ़ ऐसे देखा, जैसे वह पागल हो गयी हो । दुनियाँ इक्कीसवीं सदी में आ गयी पर इन औरतों और जाहिल लोगों के दिमाग से सदियों पुराने भूत प्रेत के झूठे ख्याल नहीं गये ।
वह तकिये के सहारे बैठ गया और उसने राजवीर को अपनी गोद में गिरा लिया ।
फ़िर वह उसकी तरफ़ देखता हुआ बोला - कैसे होते हैं भूत प्रेत, तूने आज तक देखे हैं । तुझे पता है सिख लोग भूत प्रेत को बिलकुल नहीं मानते । ये सब जाहिल गंवारों की बातें हैं, भूत प्रेत..आज तक किसी ने देखा है, भूत प्रेत को ।
फ़िर उसने जैसे मूड खराब होने का सा अनुभव करते हुये उसके गालों को सहला दिया । मानों उसका ध्यान इस फ़ालतू की बकबास से हटाने की कोशिश कर रहा हो लेकिन राजवीर के दिलोदिमाग में कुछ अलग ही उधेङबुन चल रही थी, जिसे वह मनदीप को बता नहीं पा रही थी ।
फ़िर उसने सोचा, अभी मनदीप से बात करना बेकार है, शायद वह सीरियस नहीं है इसलिये फ़िर कभी दूसरे मूड में बात करेगी । यही सोचते हुये उसने मनदीप का हाथ अपने सीने से हटाया और कपङे ठीक करके बाहर निकल गयी ।
जस्सी दीनदुनियाँ से बेखबर सो रही थी पर राजवीर की आँखों की नींद उङ चुकी थी, और वह रह रहकर करवटें बदल रही थी ।


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बहुचर्चित एवं अति लोकप्रिय लेखक राजीव श्रेष्ठ यौगिक साधनाओं में वर्षों से एक जाना पहचाना नाम है। उनके सभी कथानक कल्पना के बजाय यथार्थ और अनुभव के धरातल पर रचे गये हैं। राजीव श्रेष्ठ पिछले पच्चीस वर्षों में योग, साधना और तन्त्र मन्त्र आदि से सम्बन्धित समस्याओं में हजारों लोगों का मार्गदर्शन कर चुके हैं।